अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: क्या हिन्दू योग को स्वीकार कर पाए हैं इस्लामिक देश ?

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दुनिया भर में कई मुस्लिम, ईसाई और यहूदी योग को लेकर इस तरह के संदेह ज़ाहिर करते हैं.  वे योग को हिंदू और बौद्ध धर्म से जुड़ी एक प्राचीन आध्यात्मिक साधना के रूप में देखते हैं. साल 2012 में ब्रिटेन में एक योग क्लास को चर्च ने प्रतिबंधित कर दिया था.

पादरी जॉन शैंडलर बताते हैं, “योग एक हिंदू आध्यात्मिक साधना है. एक कैथोलिक चर्च होने के नाते हमें गॉस्पल (ईसा के उपदेश) को प्रचारित करना चाहिए.”

अमरीका में भी प्रमुख पादरी योग को “शैतानी” बता चुके हैं. तो क्या योग बुनियादी रूप से एक धार्मिक क्रिया है?

‘योगा लंदन’ की सह संस्थापक रेबेका फ्रेंच कहती हैं, “योग एक व्यापक शब्द है और इस कारण कठिनाई होती है.”वह बताती हैं कि योग कई तरह के हैं और उनमें से कुछ दूसरों के मुक़ाबले अधिक धार्मिक हैं. उदाहरण के लिए हरे कृष्णा साधु भक्ति योग के अनुयायी हैं. पश्चिम में लोग आम तौर पर जिसे योग समझते हैं वो हठ योग है. इसमें शारीरिक और मानसिक शक्ति बढ़ाने पर ज़ोर होता है.लेकिन जिसे चेतना माना जाता है वो परंपरा पर भी निर्भर है.कई हिंदुओं के मुताबिक़ योग के ज़रिए आप प्रकृति से सही स्वरूप और अपनी वास्तविक स्थिति के बारे में जान सकते हैं.जबकि कई इसे जन्म-मृत्यु के बंधनों से छुटकारा पाने का साधन मानते हैं. ये सब ईसाइयत, इस्लाम और दूसरे धर्मों में मान्य है या नहीं ये एक बहस का विषय है. उदाहरण के लिए सूर्य नमस्कार शारीरिक क्रियाओं से संबंधित एक यौगिक आसन है, लेकिन यह हिंदू देवता सूर्य की आराधना से भी जुड़ा हुआ है.

फ्रेंच बताती हैं, “ये थोड़ा धार्मिक है, लेकिन ये आपके नज़रिए पर निर्भर करता है. अगर मैं चाहूं तो घुटने टेकने का मतलब प्रार्थना करना भी है और मैं ये भी सोच सकती हूं कि मैं तो सिर्फ झुक रही हूं.”

एक हिंदू मंदिर में योग सीखने के लिए जाते वक़्त ये सवाल फ़रीदा हमज़ा के मन में थे. उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा है, “मैं ख़ुद को दोषी मान रही थी, लेकिन अंत में मुझे भरोसा हो गया कि अल्लाह मेरे इरादों को समझते हैं. मैंने उन लोगों को बता दिया कि मैं किसी धार्मिक कर्मकांड में शामिल होना नहीं चाहती हूं और उन्होंने मेरी भावनाओं का पूरा सम्मान किया.”

ईरान में योग एक खेल योग कक्षाएं कई तरह की होती हैं. कई में हिंदू मंत्रों का पाठ किया जाता है जबकि दूसरों में जीवनदायी शक्तियों और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का हवाला दिया जाता है. कक्षाओं का अंत प्रार्थना और नमस्ते के रूप में किए गए अभिवादन से होता है. कई बार ध्यान साधना के दौरान ओम मंत्र का जाप किया जाता है. लेकिन कई कक्षाओं में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है. ईरान में योग काफी लोकप्रिय है और वहां इसे एक खेल के रूप में देखा जाता है. योग फ़ेडरेशन वैसे ही काम करते हैं जैसे कि टेनिस या फुटबॉल फ़ेडरेशन. वहां प्रत्येक आसन के शारीरिक लाभों के बारे में चर्चा की जाती है.

आध्यात्मिक योग पर ऐसे ही प्रतिबंध मलेशिया में भी हैं. अमरीका में भी योग को नया स्वरूप दिया गया है. कई लोगों ने अष्टांग योग के नाम को लेकर आपत्ति की तो आसनों के नाम बदल दिए गए. कई स्कूलों में पद्म आसान को ‘क्रिस-क्रॉस एपल सॉस’ नाम दिया गया है और सूर्य नमस्कार का नाम बदलकर ‘ओपनिंग सीक्वेंस’ हो गया है. आयोजक इस बात पर ज़ोर देते हैं कि यह महज़ एक शारीरिक कसरत है. इसके बावजूद कुछ अभिभावकों और ईसाई संगठनों ने इस पर आपत्ति की.

साल 2013 के सितंबर में सैन डिएगो काउंटी कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि हालांकि योग की जड़ में धर्म है, लेकिन उसके संशोधित रूप का अभ्यास और स्कूलों में उसकी शिक्षा देना सही है.ईसाई संगठन नेशनल सेंटर फॉर लॉ एंड पॉलिसी के अध्यक्ष डीन ब्रॉयल्स बताते हैं, “पश्चिम में कई लोग योग को ग़ैर धार्मिक इसलिए मानते हैं क्योंकि ये तर्क को बढ़ावा देता है.”वह बताते हैं कि प्रोटेस्टेंट ईसाई शब्दों और विश्वास पर फोकस करते हैं जबकि अष्टांग योग अभ्यास और अनुभव की बात कहता है.हिंदू संगठन भी मानने हैं कि योग की कुछ अवधारणाओं का दूसरे धर्मों के साथ विरोध हो सकता है, लेकिन उसका ऐसा विरोध हिंदू धर्म की कुछ मान्यताओं के साथ भी है.

एक ईरानी योग शिक्षक ने  बताया कि उनके छात्रों का कहना है कि योग का अभ्यास करने के बाद वे अधिक एकाग्रता के साथ प्रार्थना कर पाते हैं. फ़रीदा हमज़ा कहती हैं, “हम इस्लाम में जिन शिक्षाओं का अनुकरण करते हैं, वे सभी योग में समाहित हैं. जैसे कि ग़रीबों की मदद करना, एक योगी भी ऐसा ही करता है. आपको ईमानदार होना चाहिए, अहिंसक होना चाहिए- ये सभी बातें इस्लाम में भी हैं और योग में भी.” वह बताती हैं, “मुस्लिम जिस तरह से प्रार्थना करते हैं, हमारी हर अवस्था एक यौगिक मुद्रा है. जो मुस्लिम योग से घृणा करते हैं, उन्हें योग के बारे में पता नहीं है. मुस्लिम प्रार्थना के समय अपनी बीच वाली उंगली और अंगूठे को मिलाते हैं, यह योग मुद्रा की तरह है.” हालांकि वह कहती हैं कि वो ये नहीं मानती हैं कि इस्लाम पर योग का प्रभाव पड़ा है.हमज़ा के मुताबिक़, “ये अल्लाह की मेहरबानी है कि मैं योग करती हूं. इस रूप में उन्होंने मुझ पर मेहरबानी की है.”