भारतीय सेना का गौरव है ये गांव, परमवीर चक्र से शौर्य चक्र तक 247 मेडल हैं सपूतों के नाम

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नई दिल्ली
सरहद पर देश की रक्षा करता हुआ "झुंझुनूं का एक ओर लाल शहीद हो गया" जब खबर ऐसे आती हैं तब राजस्थान का यह जिला सीना तानकर गर्व से अपने सपूत पर नाज करता हैं। तिरंगे में लिपटकर जब लाडला घर की दहलीज पर पहुंचता हैं तो मां बेटे को अपनी छाती से लगाकर देश के लिए अपने दूसरे बेटे को आगे कर देती है। शौर्य और बलिदान की गाथा सुनाता हैं राजस्थान का झुंझुनू जिला, जिसको शहीदों का जिला कहा जाता है।  

झुंझुनूं जिला मुख्यालय से करीब बीस किलोमीटर दूर स्थित हैं धनूरी और नूआं गांव, इन गावों में कई परिवार ऐसे हैं, जिनमें पिछली पांच पीढ़ियों से फौज में भर्ती होने की परंपरा भी हैं और जूनून भी। यह मुस्लिम बाहुल्य गांव है और इस गांव की मिट्टी को लोग सिर- माथे पर लगाते हैं। धनूरी में धर्म, मजहब जात-पात सबसे ऊपर हैं अपना मुल्क " हिन्दुस्तान "।   

झुंझनू के सीने पर लगे हैं गर्व के मैडल

  •     1 परमवीर चक्र
  •     75 वीर चक्र
  •     4 कीर्ति चक्र
  •     37 शौर्य चक्र
  •     130 सेना मैडल
  •     कुल 247 मैडल झुंझुनू  के सपूतों के नाम हैं।   

पहला विश्व युद्ध हो, या फिर दूसरा विश्व युद्ध, 1962, 1965, 1971 और कारगिल का युद्ध हो, ऐसा कोई ऑप्रेशन नहीं जहां इस गांव का शहीद न हो। शेखावाटी के नौजवानों के खून में सैनिक बनने का जुनून होता हैं, जन्म से जवानी तक आस पास बस देश के लिए कुर्बानी, देशसेवा और सबसे पहले देश का जज्बा फिजा में महसूस करता हैं यहां का बाशिंदा। ' मिट्टी और मां ' दोनों से जिंदगी शुरू होती हैं और इन दोनों पर ही फना।

राजस्थान के पहले और देश के दूसरे परमवीर चक्र पाने वाले शहीद पीरू सिंह मेजर पीरू सिंह का जन्म 20 मई 1918 को गांव रामपुर बेरी में हुआ था, 20 मई 1936 को 6 राजपुताना राइफल्स में भर्ती हुए कंपनी हवलदार मेजर पेरू सिंह को उनके वलिदान के लिए मरणोपरांत सर्वोच्च वीरता पुरुस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था सौ साल पहले जन्म हुआ था इस वीर सपूत का। शहीद मोहम्मद हसन, जिनको 1971 युद्ध में अहम भूमिका निभाई। देश के लिए कुर्बान देने के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। कश्मीर के नहडर इलाके में शहादत दी थी ।  

झुंझुनू का धनूरी गांव देश का एक ऐसा गांव है जहां देश की हिफाजत में सबसे ज्यादा जवान शहीद हुए है। यहां पर फौज में जाना हैं परम्परा। शेखावाटी के नौजवानों के खून में सैनिक बनने का  जुनून ।
 
धनूरी गांव में अब तक करीब 15 सैनिकों की शहादत हो चुकी हैं, जिनमें से 14 मुसलमान हैं। प्रथम विश्वयुद्ध में शहादत काले खान, करीम बख्श खान, अब्दुल करीम खान, अल्ताफ खान, फैजल खाल, अजीमुद्दीन खान शहीद हुए। दूसरे विश्व युद्ध में गुलाम अली खान ताज मोहम्मद खान ने शहादत दी।

1962 के युद्ध में मोहम्मद इलियास खां, मोहम्मद सफी खां और निजामुद्दीन खां ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए।मेजर एचएम खान और मोहम्मद हसन ने 1971के युद्ध में पाकिस्तान से युद्ध लड़ा था और जिसके लिए इन्हें वीर चक्र मिला |    1971 युद्ध में मेजर एचएम खान, जाफर अली खान, कुतुबद्दीन शहीद हुए जिसके लिए पूरा देश आज भी फक्र से बोलता हैं ये हैं हमारे वीर सपूत। 1999 के करगिल युद्ध में इसी गांव के मोहम्मद रमजान खां ने अपनी शहादत दी थी। करीब 300 सैनिक आज भी तैनात है सरहद पर ।