September 21, 2021

रणवीर सिंह की ‘सर्कस’ के लिए हायर किए थे 150 ट्रेंड जिमनास्ट और एक्रोबैट्स

Spread the love

रणवीर सिंह की ‘सर्कस’ फिल्म को बहतर बनाने के लिए रोहित शेट्टी ने बाकायदा 150 ट्रेंड जिमनास्ट और एक्रोबैट्स को हायर किया। फिल्म से जुड़े सूत्रों ने बताया, एक बड़ी सर्कस कंपनी की दुनिया क्रिएट की गई है। इस बार कॉमेडी को गंभीर रखा गया है, न कि लाउड कॉमेडी और जोकर पने को। सर्कस कंपनी में काम करने वालों की जिंदगी को मेटाफर के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। पूरी फिल्म में सर्कस कंपनी में काम करने वाले जिमनास्ट और एक्रोबैट्स के साथ जिंदगी कैसे करतब करती है, उसे बतौर मेटाफर इस्तेमाल किया गया है। जैसे कि एक आम इंसान भी पूरी जिंदगी करतबें करता रहता है। वह जहां फंसता है, वहां कॉमेडी बनती रहती है। फिल्म में मेन लीड किरदारों के साथ-साथ यह मेटाफर भी बतौर सब-प्लॉट पूरी फिल्म में मौजूद है। सेट पर मौजूद सूत्रों ने बताया, रणवीर सिंह के किरदार के जरिए रोहित शेट्टी ने लगभग विलुप्त हो रही सर्कस संस्कृति को फिर से लोगों के सामने लाने की कोशिश की है। रणवीर फिल्म में सर्कस संचालक के रोल में नजर आएंगे हैं। 90 के दशक में सर्कसों की कंपनियों में जो बहादुरी भरी कलाबाजियां और जादुई खेल होते थे, वह सब इस फिल्म में है। इससे फिल्म को विजुअली खूबसूरत बनाने में मदद मिली है। रोहित ने उन ट्रेंड 150 जिमनास्ट और एक्रोबैट्स के साथ 15 दिन लगातार शूटिंग की है। पूरी फिल्म 90 दिनों तक शूट हुई। इस तरह शूट का एक बड़ा हिस्सा सर्कस के पहलू को दिया गया है। उन हिस्सों को बाकायदा परफॉरमिंग आर्ट मानते हुए शूट किया गया है। सूत्रों ने रणवीर के रवैये के बारे में भी अहम जानकारियां दीं और बताया, रणवीर बड़े स्टार बन चुके हैं, मगर आज भी वो डायरेक्टर के कन्विक्शन के सामने खुद को सरेंडर कर देते हैं। वे शूट के समय स्क्रिप्ट में बदलाव की मांग नहीं करते थे। फिल्म की शूटिंग ज्यादातर नाइट में हुई है। इसके चलते एक्टर्स को लोकेशन पर आने जाने में काफी दिकत होती थी। जानने वालों के फोन भी उस दौरान नहीं आते थे। कोविड प्रोटोकॉल्स के पालन में भी अतिरिक्त मदद मिलती गई। साथ ही रणवीर को दो घंटे और भी मिल जाते थे। उसमें वो सेट पर बाकी कलाकारों के साथ रोजाना रिहर्सल भी कर लिया करते थे। इस तरह शूट के समय ही उन्हें कैरेक्टर की प्रिपरेशन का मौका मिल जाता था। इस वजह से उन्हें अलग से रीडिंग सेशंस वगैरह नहीं करने पड़ते थे। सेट पर रिहर्सल आम कपड़ों में होती थी। फिर सब अपने अपने किरदारों के गेटअप के मुताबिक कॉस्ट्यूम में आते थे।