September 21, 2021

41 साल बाद भारत ने हॉकी में जीता मेडल, जर्मनी को 5-4 से हराया 

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टोक्यो
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से हराकर 41 साल बाद हॉकी में ब्रॉन्ज मेडल जीत लिया है। रेसलिंग में रवि दहिया भारत को गोल्ड दिला सकते हैं। वह पुरुषों के फ्रीस्टाइल 57 किग्रा फाइनल में पहुंच गए हैं और आज दोपहर बाद दो बजकर 45 मिनट से उनका मुकाबला शुरू होना है। अगर रवि जीतते हैं तो उन्हें गोल्ड मिलेगा और अगर हारते हैं तो सिल्वर मेडल। वह रूस ओलंपिक समिति के जावुर युगुऐव के खिलाफ मैट पर होंगे। उनके अलावा दीपक पूनिया भी अपने ब्रॉन्ज मेडल मैच में उतरेंगे। महिला वर्ग में विनेश फोगाट ने फ्रीस्टाइल 53 किग्रा में स्वीडन की सोफिया मैगडेलेना मैटसन को हराकर क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह बना ली है। वहीं, महिला पहलवान अंशु मलिक फ्रीस्टाइल 57 किग्रा का अपना ब्रॉन्ज मेडल मैच हार गई हैं। भारत एथलेटिक्स में भी अपनी चुनौती पेश करेगा।  भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक के ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से हराकर 41 साल बाद हॉकी में मेडल जीत लिया है।  

 आखिरी मिनट में जर्मनी को पेनाल्टी कॉर्नर मिला था, लेकिन गोल नहीं कर पाए। भारत ने आखिरी बार 1980 ओलंपिक में गोल्ड जीता था।

31वें मिनट में मनदीप सिंह के पहल के बाद भारत को पेनल्टी स्ट्रोक मिला। जर्मनी ने चैलेंज किया लेकिन फायदा नहीं हुआ। रुपिंदर सिंह ने स्ट्रोक का फायदा उठाया और टीम को 4-3 से बढ़त दिला दी। इसके बाद 34वें मिनट में गुरजंत सिंह काउंटर रन के साथ सिमरनजीत को पास किया जिन्होंने उसे गोल में बदलकर 5-3 की लीड दिला दी।

भारत ने 1980 के मॉस्को ओलंपिक में जीता था गोल्ड मेडल

भारतीय टीम ने 1980 के मॉस्को ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन उस दौरान भारत छह टीमों के पूल में दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल का टिकट हासिल किया था.

बेहद रोमांचक हुआ मुकाबला

भारत की पुरुष हॉकी टीम ने 41 साल के अंतराल के बाद ओलंपिक पदक जीतने का गौरव हासिल किया है. भारत ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक के लिए हुए रोमांचक मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से हराया. भारतीय टीम सेमीफाइनल में बेल्जियम के हाथों हार गई थी. इसके बाद उसे कांस्य जीतने का मौका मिला था. जर्मनी के खिलाफ एक समय भारतीय टीम 1-3 से पीछे चल रही थी, लेकिन सात मिनट में चार गोल करते हुए भारतीय खिलाड़ियों ने मैच की दिशा अपनी ओर मोड़ दी.

टोक्यो में भारत का यह चौथा पदक
टोक्यो में भारत का यह चौथा पदक है. भारत हॉकी के अलावा वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन और मुक्केबाजी में पदक जीत चुका है जबकि इस हार के साथ जर्मनी के हाथों 2016 के रियो ओलंपिक के बाद लगातार दूसरा कांस्य जीतने का मौका निकल गया.

सिमरनजीत सिंह ने दिलाई अच्छी शुरुआत

बहरहाल, मैच का पहला गोल दूसरे मिनट में जर्मनी के तिमोर ओरुज ने किया. ओरुज ने एक बेहतरीन फील्ड गोल के जरिए अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया. जर्मनी ने इसी अंतर से दूसरे क्वार्टर में प्रवेश किया. सिमरनजीत सिंह ने हालांकि इस क्वार्टर की शुरुआत में ही 17वें मिनट में गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया. यह एक फील्ड गोल था.

भारत ने भी हार नहीं मानी

निकलास वालेन ने हालांकि 24वें और फिर बेनेडिक्ट फुर्क ने 25वें मिनट में गोल कर जर्मनी को एक बार फिर 3-1 से आगे कर दिया. भारत ने भी हार नहीं मानी और 27वें तथा 29वें मिनट में गोल कर स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया. 27वें मिनट में हार्दिक सिंह ने पेनाल्टी कार्नर पर गोल किया जबकि 29वें मिनट में भी पेनाल्टी कार्नर पर ही गोल हुआ जो हर्मनप्रीत सिंह ने किया.

भारतीय हॉकी टीम के आक्रामक तेवर

हाफटाइम तक स्कोर 3-3 था. इसके बाद तो भारत नहीं रुका और एक के बाद एक गोल कर 5-3 की लीड ले ली. रुपिंदर पाल सिंह ने 31वें मिनट में पेनाल्टी स्ट्रोक पर भारत के लिए चौथा गोल किया, जबकि हर्मनप्रीत सिंह ने 34वें मिनट में अपना दूसरा और टीम के लिए पांचवां गोल किया.

जर्मन टीम को नहीं मिला कोई मौका

जर्मन टीम भी हार मानने वाली नहीं थी. उसने 48वें मिनट में अपना चौथा गोल कर मैच में रोमांच ला दिया. जर्मनी के लिए यह गोल लुकास विंडफेडर ने पेनाल्टी कार्नर पर किया. अब स्कोर 4-5 हो चुका था. अंतिम समय में जर्मन टीम ने कई हमले किए लेकिन भारतीय डिफेंस मुस्तैद था. उसने तमाम हमलों को नाकाम कर स्कोर की रक्षा की और 41 साल से चले आ रहे सूखे को समाप्त किया.

ओलंपिक में भारतीय हॉकी का इतिहास

भारत ओलंपिक में सबसे सफल टीम है जिसने 8 स्वर्ण पदक जीते हैं। लेकिन पुरुष हॉकी टीम ने 1980 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद से कोई पदक नहीं जीता है। स्वर्ण पदक जीतने का सपना कुछ दिन पहले ही समाप्त हो गया। हालांकि भारत के पास कांस्य पदक के साथ अभियान खत्म करने का मौका है। भारतीय हॉकी के इतिहास में यह एक बहुत बड़ा क्षण है क्योंकि आज की जीत क्रिकेट के प्रति जुनूनी देश में हॉकी को फिर से जिंदा करने के लिए जरूरी है।