लॉकडाउन के कारण बंद जन सुनवाई शुरू हुई, बड़ी संख्या में लोग पहुंचे

Spread the love

भोपाल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर प्रदेशभर में जनसुनवाई एक बार फिर शुरू हो गई है। कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी, आईजी, नगर निगम आयुक्त, नगर पालिका परिषद के सीएमओ सहित सभी सरकारी विभागों में आज से एक साथ जनसुनवाई का दौर शुरू हो गया। राज्य सरकार ने हर मंगलवार को आमजन से जुड़े सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों में जनसुनवाई शुरू करवाई थी। लेकिन मार्च 2020 में कोरोना के चलते लॉकडाउन लगने के बाद अधिकांश स्थानों पर भौतिक रूप से होने वाली जनसुनवाई बंद हो गई थी। कुछ स्थानों पर यह यह आॅनलाइन हो रही थी। कलेक्टर-कमिश्नर, एसपी और आईजी सहित नगरीय निकायों के दफ्तरों में आज लंबे समय बाद शुरू हुई इन सुनवाई में काफी संख्या में लोग पहुंचे और अपनी समस्याएं अफसरों के सामने  रखी। अधिकारियोें ने तत्काल इन समस्याओं के निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। कई समस्याओं का मौके पर ही निपटारा किया गया।

भोपाल में करीब छह महीने के बाद मंगलवार को एक बार फिर से जनसुनवाई शुरू हुई। कलेक्ट्रेट में दोपहर 12 बजे तक करीब दो दर्जन लोगों की शिकायतें सुनीं। महीनों बाद शुरू हुई इस जनसुनवाई के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनना जरूरी किया गया था। आवेदक सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अपनी शिकायतों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। कलेक्टर अविनाश लवानिया ने बताया कि शासन के निर्देश पर आज विधिवित सभी विभागों के अफसरों की उपस्थिति में आवेदकों की शिकायतें सुनी गई और उन पर अमल किया गया।  

ग्वालियर में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने पीड़ितों की समस्याएं सुनीं और उनके उचित हल के लिए संबंधित अफसरों फाइल भेजी। इधर नवनियुक्त निगम कमिश्नर किशोर कान्याल और एसपी अमित सांघी ने पीड़ित लोगों की समस्याएं सुनीं। कलेक्ट्रट में जमीन संबंधी मामले और भूमाफिया के खिलाफ शिकायतें आईं। वहीं नगर निगम में विधवा, निराश्रित पेंशन न मिलने वाले और सड़क, सीवर की समस्या वाले लोग ज्यादा थे।

जबलपुर में एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा फरियादियों से रूबरू हुए, वहीं नगर निगम में अधिकारी बैठे रहे और एक घंटे तक एक भी शिकायतकर्ता नहीं पहुंचा। लंबे समय बाद शुरू हुई जनसुनवाई में एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने कार्यालय पहुंचते ही शहर एवं अंचल से आए पीड़ितों के शिकायती आवेदनों पर सुनवाई की। उन्होने संबंधित थाना प्रभारी एवं संभागीय अधिकारी को मामले का तत्काल निकाल करने के निर्देश दिए गए।