नवाब मलिक हाई कोर्ट से बोले – समीर वानखेड़े और परिवार के खिलाफ 9 दिसंबर तक नहीं करूंगा कोई पोस्ट

Spread the love

मुंबई
महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक ने गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि वह 9 दिसंबर तक मुंबई एनसीपी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े या उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कुछ भी पोस्ट नहीं करेंगे। मलिक का यह जवाब समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े की ओर से हाई कोर्ट में दायर एक अपील पर आया है। दरअसल, समीर वानखेड़े ने बॉम्बे हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के 22 नवंबर के आदेश को डिजिवजन बेंच के सामने चुनौती दी है। अब डिविजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सिंगल बेंच ने वानखेड़े की ओर से मांगी गई अंतरिम रोक को देने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि मलिक को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करने से पहले कंटेट को उचित रूप से सत्यापित करना चाहिए। कोर्ट के इस आदेश के बाद ज्ञानदेव वानखेड़े ने डिविजन बेंच के समक्ष अपील दायर करते हुए कहा कि मलिक 22 नवंबर के आदेश के बाद भी बिना सत्यापन किए ही चीजों को पोस्ट कर रहे हैं।

वानखेड़े के वकील ने कोर्ट में दी यह दलील
इसके अलावा मलिक ने गुरुवार को जस्टिस एसजे कथावाला और जस्टिस मिलिंद जाधव की खंडपीठ को सूचित किया कि वह भी 22 नवंबर के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की प्रक्रिया में हैं। वहीं, वानखेड़े के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ बीरेंद्र सराफ ने गुरुवार को कहा कि सोशल मीडिया किसी के लिए भी किसी के खिलाफ कुछ भी कहने का एक मंच बन गया है। सिंगल बेच के आदेश का जिक्र करते हुए सराफ ने कहा कि जज ने देखा कि मलिक की ओर से पोस्ट किए गए ट्वीट दुर्भावनापूर्ण थे और समीर वानखेड़े के खिलाफ भ्रष्ट्राचार के आरोप इत्तेफाक से लगाए गए थे।

मलिक ने छह दिन बाद कोर्ट को दिए थे दस्तावेज
उन्होंने यह भी बताया कि सिंगल बेंच ने 12 नवंबर को दोनों पक्षों को पूरी तरह से सुना था और मानहानि के मुकदमे में ज्ञानदेव वानखेड़े की ओर से दायर अंतरिम आवेदन पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। छह दिन बाद मलिक ने कोर्ट के समक्ष अतिरिक्त दस्तावेज पेश किए थे जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। वहीं, मलिक के वकील ने कोर्ट को बताया कि 18 नवंबर को जमा किए गए दस्तावेज केवल मानहानि के मुकदमें से जुड़े दस्तावेजों की सत्यता से संबंधित थे।