मध्य प्रदेश: फिर विवेक तन्खा को राज्यसभा भेज सकती है कांग्रेस

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भोपाल
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हो रही हैं जिनमें से एक सीट कांग्रेस के खाते की होगी और दो भाजपा के हिस्से में आएगी। कांग्रेस कार्यकाल पूरा करने वाले विवेक तन्खा को दूसरी बार फिर राज्यसभा भेज सकती है तो भाजपा विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों ही सीटों को मध्य प्रदेश से भर सकती है। इसमें भाजपा द्वारा आदिवासी और ओबीसी कार्ड का सहारा लिया जा सकता है।

मध्य प्रदेश में 29 जून को विवेक तन्खा, एमजे अकबर और संपतिया उइके का कार्यकाल पूरा है। इनके लिए राज्यसभा के चुनाव 10 जून को होने जा रहे हैं जिसमें 24 मई से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मध्य प्रदेश में विधायक संख्या के हिसाब से भाजपा के हिस्से में दो और कांग्रेस के हिस्से में एक सीट आना है। अभी भी यह स्थिति है लेकिन भाजपा की दो सीटों में से एक सीट एमजे अकबर की है। अकबर को भाजपा हाईकमान ने मध्य प्रदेश के रास्ते राज्यसभा भेजा था लेकिन इस बार अकबर को दूसरी बार यहां से भेजे जाने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

तन्खा के दूसरी बार राज्यसभा जाने की संभावना
राज्यसभा में कांग्रेस वरिष्ठ अधिवक्ता  विवेक तन्खा को दूसरी बार फिर मौका दे सकती है। तन्खा मध्य प्रदेश की कांग्रेस की राजनीति में अभी तक तटस्थ नेता माने जाते हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण के बिना पंचायत चुनाव का फैसला सुनाए जाने के बाद उनकी सलाह पर ही पूर्व मुखयमंत्री कमलनाथ ने तुरत ऐलान किया था कि कांग्रेस पंचायत व निकाय चुनाव में ओबीसी के 27 फीसदी नेताओं को टिकट देगी। तन्खा की दिल्ली हाईकमान में भी पकड़ है और वरिष्ठ अधिवक्ता होने के नाते उनकी वहां जरूरत भी महसूस की जाती रहती है। इसलिए उनके दोबारा राज्यसभा सदस्य बनाए जाने की संभावना ज्यादा है।  

ओबीसी को खुश करने कांग्रेस बदल सकती है रणनीति
वहीं, कांग्रेस हाल की बदली हुई परिस्थितियों में ओबीसी कार्ड का सहारा भी ले सकती है। इसमें पूर्व पीसीसी चीफ अरुण यादव का नाम सामने आ सकता है। हाईकमान इस फैसले से आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किसी अन्य पिछड़ा वर्ग को खुश कर सकती है। पार्टी पिछली बार इस वर्ग के राजमणि पटेल को राज्यसभा भेजकर चौंकाने वाला फैसला कर भी चुकी है। पटेल का कार्यकाल 2024 में खत्म होने वाला और उस समय लोकसभा चुनाव घोषित हो चुके होंगे।

आदिवासी कार्ड में उइके को मिल सकता है फिर मौका
इधर, भाजपा के लिए राज्यसभा चुनाव में ज्यादा दिक्कत नहीं होने वाली है क्योंकि उसके पास दो सीटें हैं। पार्टी हाईकमान से विधानसभा चुनाव का हवाला देकर दोनों सीटें मध्य प्रदेश से भरने की मांग कर सकती है। ऐसी स्थिति में भाजपा आदिवासी और ओबीसी चेहरों को राज्यसभा में भेजकर दोनों ही वर्गों को साध सकती है। आदिवासी वर्ग से संपतिया उइके को दोबारा भेजा सकता है और हाल ही में वे सिवनी मॉब लिंचिंग की घटना में वर्ग के लोगों के बीच सक्रिय भी दिखाई दी थीं।

ओबीसी पर चुप्पी पर भारती को लेकर अटकलें
इसी तरह भाजपा में राज्यसभा चुनाव में ओबीसी चेहरे के नाम पर उमा भारती को पर भी पार्टी दांव खेल सकती है क्योंकि वे चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। वे शराब बंदी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार को फरवरी-मार्च के महीने में परेशानी में डाल चुकी हैं लेकिन ओबीसी रिजर्वेशन में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद से उनकी चुप्पी सरकार के लिए पहेली बन सकता है। अगर प्रदेश में ओबीसी-आदिवासी की सियासत का फार्मूला नहीं चला तो फिर एक सीट पुन: दिल्ली के खाते में जा सकती है।