राज बब्बर मना रहे अपना 70वां बर्थडे

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ऐक्टर राज बब्बर की गिनती हिंदी सिनेमा के ऐसे कलाकारों में होती है, जिन्होंने हर किरदार को ऐसे निभाया कि लोगों के दिलों में बस गया। नेगेटिव से लेकर पॉजिटिव तक हर किरदार में राज बब्बर लोगों के दिलों में छाप छोड़ने में कामयाब रहे। 45 साल के करियर में राज बब्बर ने कई हिट फिल्में दीं और खूब यादगार किरदार निभाए। फिल्म 'इंसाफ का तराजू' में जीनत अमान और राज बब्बर पर फिल्माया गया रेप सीन आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। इस फिल्म ने ऐक्टर के करियर की कायापलट कर दी थी। लेकिन राज राज बब्बर को आज तक इस बात का मलाल है कि करियर की शुरुआत में उन्होंने अमिताभ बच्चन और शशि कपूर के हाथों कई फिल्में गंवा दीं।

Raj Babbar का 23 जून को 70वां बर्थडे है और इस मौके पर हम आपको राज बब्बर के उसी इंटरव्यू के बारे में बता रहे हैं, जिसमें ऐक्टर ने इस बारे में बात की थी। राज बब्बर ने जिस भी फिल्म को हाथ में लिया, वही कोई और ले जाता। एक फिल्म के लिए तो राज बब्बर ने साइनिंग अमाउंट तक ले लिया था। लेकिन इस फिल्म से राज बब्बर को निकालकर Amitabh Bachchan को साइन कर लिया गया।

राज बब्बर ने 2016 में एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें 1982 में आई फिल्म 'शक्ति' से रिप्लेस कर दिया गया था। उनकी जगह फिल्म में अमिताभ बच्चन को साइन किया गया था। उस फिल्म में स्मिता पाटिल भी थीं, जिनके साथ राज बब्बर ने आगे चलकर शादी की। राज बब्बर ने कहा, 'यह सच है। मैं दिल्ली में नाटकों में काम करता था और सलीम-जावेद ने मुझे वहीं से उठाया था। मेरा स्क्रीनटेस्ट दिलीप साहब को दिखाया गया। उन्होंने फिल्म में अमिताभ बच्चन के पिता का रोल निभाया। उस फिल्म के डायरेक्टर रमेश सिप्पी थे। मुझे चुन लिया गया, लेकिन कमर्शल वजहों के कारण मुझे फिल्म से हटा दिया गया।'

राज बब्बर ने बताया कि मेकर्स को लगा कि अमिताभ बच्चन को फिल्म में लेने से ज्यादा मुनाफा होगा। ऐक्टर के मुताबिक, यह मेकर्स के हिसाब से सही भी था क्योंकि उस वक्त अमिताभ बच्चन बड़े स्टार थे, जबकि राज बब्बर एकदम नए थे। राज बब्बर को फिल्म 'नमक हलाल' से भी रिप्लेस कर दिया गया था। इस फिल्म में भी राज बब्बर की जगह अमिताभ बच्चन को साइन किया गया। हालांकि राज बब्बर ने अमिताभ के साथ बाद में फिल्म 'याराना' और 'पेट प्यार और पाप' में काम किया था।

राज बब्बर का दर्द- जो मुझे मिलना चाहिए था, कोई और छीनकर ले गया
इस बारे में पूछे जाने पर राज बब्बर ने कहा था, 'सर, मेरे साथ ऐसे हादसे होते रहे। जो मुझे मिलना चाहिए था वो छीनकर कोई और ले जाता था। लेकिन छीनकर नहीं कहूंगा। प्रकाश मेहरा ने मुझे दो फिल्मों के लिए साइन किया था। उनमें से एक फिल्म थी 'नमक हलाल'। मैंने उनसे कहा कि मेरे पास मुंबई में रहने की कोई जगह नहीं है तो आपको मुझे एक घर देना होगा। तो प्रकाश मेहरा ने मुझे एक साल तक रहने की जगह दी, लेकिन बाद में जब उन्होंने कहा कि मैं तुम्हें ये रोल नहीं दे सकता तो मैंने कहा कि मैं अभी एक साल और इस घर में रहूंगा। उसी घर की बदौलत में मुंबई में अपना घर बना पाया।'

1977 में डेब्यू, रेपिस्ट के किरदार ने बदली राज बब्बर की किस्मत
राज बब्बर ने 1977 में फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' से शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने 'आप तो ऐसे ना थे', 'जज्बात', 'सौ दिन सास के' और 'छन परदेसी' जैसी फिल्में कीं, जिनमें उन्हें कुछ खास पहचान नहीं मिली। इसके बाद उन्हें फिल्म 'इंसाफ का तराजू' मिली, जिसमें उनके द्वारा निभाए रेपिस्ट के किरदार ने सब बदल दिया। राज बब्बर ने बताया था कि जब उस नेगेटिव किरदार कोई भी निभाने के लिए तैयार नहीं हुआ तो उन्होंने आगे बढ़कर वह किरदार अपने हाथ में लिया था। इस रोल के लिए राज बब्बर ने कई अवॉर्ड जीते।

राजनीति में आजमाई किस्मत
1989 में राज बब्बर ने राजनीति की दुनिया में कदम रखे। उन्होंने वी.पी. सिंह के नेतृत्व में जनता दल पार्टी जॉइन की। बाद में उन्होंने सपा और फिर उसके बाद कांग्रेस पार्टी जॉइन कर ली। 2021 में राज बब्बर ने वेब सीरीज की दुनिया में भी डेब्यू किया। वह वेब सीरीज 'दिल बेकरार' में नजर आए।