इंदौर के गुरुद्वारा पर तिरंगा फहराने पर गुरुद्वारा कमेटी ने ली आपत्ति

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इंदौर
 इंदौर के राजवाड़ा स्थित इमली साहिब गुरुद्वारा पर तिरंगा झंडा फहराने पर विवाद खड़ा हो गया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी ने ट्वीट कर तिरंगा फहराने पर आपत्ति जताई है। फिलहाल गुरुद्वारे पर तिरंगा ध्वज नहीं है, लेकिन उसके फोटो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए हैं। कमेटी ने ट्वीट कर कहा कि गुरुद्वारा साहिब पर खालसा निशान ही फहराया जा सकता है।

गुरुद्वारे पर झंडा फहराए जाने के मामले में गुरुसिंघ सभा के महासचिव जसबीर सिंह गांधी का कहना है कि 12 अगस्त को राजवाड़ा से राजमोहल्ला तक तिरंगा यात्रा निकली थी। उस दौरान तिरंगे ध्वज क्षेत्र में बांटे गए थे। सेवादारों के कुछ बच्चों ने झंडा लगा दिया, लेकिन जैसे ही यह जानकारी सामने आई, हमने झंडा हटवा दिया। गांधी ने कहा कि तिरंगे के प्रति पूरा सम्मान है और हमारे घरों पर भी तिरंगा ध्वज लहरा रहा है।

इस कारण नाम हुआ इमली साहिब गुरुद्वारा

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेव महाराज 504 साल पहले अपनी दूसरी यात्रा के दौरान दक्षिण से होते हुए इंदौर आए थे। यहां कान्ह नदी के किनारे इमली के पेड़ के नीचे आसन लगाकर शबद सुनाया था। इसलिए जब यहां गुरुद्वारा बनाया गया तो उसका नाम गुरुद्वारा इमली साहिब रखा गया। पहले इस स्थान की सेवा संभाल उदासी मत के पैरोकारी ने संभाली। इसके बाद होलकर स्टेट के सहयोग के लिए फौज पंजाब से आई तो उन्होंने गुरुद्वारे की व्यवस्था संभाली। अब इनकी व्यवस्था गुरुसिंघ सभा संभाल रही है।