मां-बाप के हत्यारे बेटे को 5 साल बाद सजा-ए-मौत, कोर्ट ने कही ये बड़ी बात

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 दुर्ग
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की एक अदालत ने 47 वर्षीय एक व्यक्ति को अपने माता-पिता की गोली मारकर हत्या करने के मामले में फांसी की सजा सुनाई है।

मामले में दो अन्य अभियुक्तों, जिन्होंने हत्या के आरोपी को हथियार की आपूर्ति की थी, को भी पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।

विशेष लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद शर्मा ने मंगलवार को बताया कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी की अदालत ने सोमवार को मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने इस घटना को दुर्लभ से दुर्लभतम बताते हुए संदीप जैन को फांसी की सजा दी।

 अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेश कुमार तिवारी ने सोमवार को 310 पन्नों के फैसले में महाभारत के कुछ श्लोकों का हवाला देते हुए कहा कि दोषी के लिए मौत की सजा उचित सजा होगी ताकि कोई भी फिर से माता-पिता की हत्या का इतना गंभीर अपराध करने की हिम्मत न करे।

मामले में सरकारी वकील सुरेश प्रसाद शर्मा ने मंगलवार को बताया कि मुख्य आरोपी संदीप जैन को सजा-ए-मौत हुई है। वहीं उसे हथियार मुहैया कराने वाले दो अन्य आरोपियों को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।

एक जनवरी 2018 को आरोपी संदीप जैन ने दुर्ग में अपने 72 वर्षीय पिता रावलमल जैन और 67 वर्षीय मां सुरजी देवी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्यारे संदीप के पिता प्रसिद्द व्यवसायी और सामाजिक कार्यकर्ता थे। घर में केवल 3 लोग ही रहते थे। संदिग्ध स्थिति में गोली मारकर मां-बाप की हत्या के बाद पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर संदीप को गिरफ्तार कर लिया था क्योंकि घटना के समय घर में मौजूद दो मृतकों के अलावा वह अकेला व्यक्ति था।

5 साल तक चले मुकदमे में अदालत में आखिरकार यह साबित हुआ कि आरोपी संदीप और उसके पिता के बीच संपत्ति सहित कई मुद्दों पर मतभेद थे और इसी के चलते आरोपी ने सम्पत्ति पूरी तरीके से हथियाने के लिए मां और बाप दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा सरकारी वकील ने कहा कि एक मुद्दा यह भी था कि आरोपी के पिता ने पूजा पथ के दौरान पास की नदी से पानी लाने के लिए कहने पर भी गुस्सा हुआ था और जिसके बाद दोनों में विवाद बढ़ गए थे। सरकारी वकील ने बताया कि संदीप ने अपने माता-पिता की हत्या संपत्ति से बेदखल होने के डर से कर दी।

अदालत ने दलीलें सुनने और सबूतों की पुष्टि करने के बाद संदीप को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया। संदीप को पिस्टल देने वाले भगत सिंह गुरुदत्त और शैलेंद्र सागर को पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई और प्रत्येक पर 1 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।